कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ती बीजेपी, एक साल में 81.18 प्रतिशत बढ़ी आय – एडीआर

वर्ष 2016-17 में देश के सात राष्ट्रीय दलों ने कुल 1,559.17 करोड़ रुपये की आय घोषित की. इनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आय सबसे ज्यादा 1,034.27 करोड़ रुपये रही.

दिल्ली स्थित संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘यह राशि वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय दलों द्वारा जुटाई गई कुल राशि का 66.34 प्रतिशत है.’

इस आय के लिहाज से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) का दूसरा स्थान रहा है. कांग्रेस को समान अवधि में राष्ट्रीय दलों को प्राप्त कुल राशि में से 225.36 करोड़ रुपये यानी 14.45 प्रतिशत राशि मिली है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) को इस दौरान सबसे कम 2.08 करोड़ रुपये यानी 0.13 प्रतिशत की आय हुई है.

ये आंकड़े देशभर के राजनीतिक दलों द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न से जुटाये गए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के सात राष्ट्रीय दलों ने संबंधित वर्ष में 1,228.26 करोड़ रुपये का कुल व्यय घोषित किया है.

भाजपा ने 2016-17 में सबसे ज्यादा 710.05 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया है. जबकि कांग्रेस ने इस दौरान कुल 321.66 करोड़ रुपये का खर्च किया है, जो कि उसकी वार्षिक आय से 96.30 करोड़ रुपये ज्यादा है.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 2016-17 में कुल 173.58 करोड़ रुपये की आय हुई है, जबकि उसका कुल व्यय 51.83 करोड़ रुपये रहा है.

एक साल के अंतराल (2015-16 से 2016-17) के दौरान भाजपा की आय 81.18 प्रतिशत बढ़ी है. इस दौरान भाजपा की आय 570.86 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,034.27 करोड़ रुपये हो गई. जबकि इस अवधि में कांग्रेस को मिलने वाली राशि 261.56 करोड़ रुपये से घटकर 225.36 करोड़ रुपये रह गई.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की आय पिछले दो वर्ष में 88.63 प्रतिशत बढ़कर 17.23 करोड़ रुपये हो गई. 2015-16 में एनसीपी की कुल आय 9.14 करोड़ रुपये थी.

भाजपा और कांग्रेस ने दान और योगदान को अपनी आय का मुख्य स्रोत बताया है.

राजनीतिक दलों के लिए सालाना ऑडिट खातों को दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर, 2017 थी. भाजपा ने अपने खातों की जानकारी 99 दिन की देरी से 8 फरवरी, 2018 को दी, तो वहीं कांग्रेस ने 138 दिन की देरी के साथ 19 मार्च, 2018 को अपने खातों की जानकारी का खुलासा किया.

एडीआर ने यह भी कहा कि सात राष्ट्रीय दलों में से चार- भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई- ने पिछले पांच सालों से अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्ट जमा करने में लगातार देरी की है.

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