झारखंड सरकार की ‘विकास गाथा’,40 मिनट की दूरी तय करने में लग गये चार घंटे, पीड़िता की मौत

स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के विधानसभा क्षेत्र विश्रामपुर के अमवा गांव की जर्जर सड़क ने बीमार जलावती कुंवर (65) की जान ले ली. बुखार से तड़पती जलावती को करीब ढाई किलोमीटर दू्र खटिया पर लेकर परिजन राजहरा स्टेशन पहुंचे. इसके बाद ट्रेन से 22 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय मेदिनीनगर पहुंचे. सदर अस्पताल में  भर्ती कराने के कुछ देर बाद ही जलावती कुंवर की मौत हो गयी.  मृतका के पुत्र जगजीवन राम ने कहा कि समय पर मां का इलाज हो जाता, तो उसकी जान बच जाती.
गांव जाने को कोई वाहनवाला तैयार नहीं हुआ : जगजीवन राम ने कहा कि  मां गंभीर रूप से बीमार थी. उसे इलाज के लिए मेदिनीनगर लाना था.
उसने कई वाहन संचालकों  से संपर्क किया, पर कोई भी सड़क   की स्थिति को देखते हुए गांव जाने के लिए तैयार नही हुआ. कहा कि बरसात में सड़क कीचड़ से भरा है. वाहन जायेगा ही नहीं. यदि जायेगा, तो भी फंस जायेगा.  इधर वाहन जाने के लिए  तैयार नहीं था और उधर मां की तबीयत बिगड़ रही थी. मेदिनीनगर  लाना  था, इसलिए ट्रेन का इंतजार होने लगा, क्योंकि ट्रेन के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
अमवा गांव के लोग ट्रेन पकड़ने  के लिए  राजहरा स्टेशन आते हैं, जो गांव से करीब ढाई किलोमीटर दूर  है.  स्टेशन जाने के लिए भी परिजनों ने खटिया की डोली बनायी और उसकी मां को उस पर  लाद कर लाया, लेकिन तब तक उसकी स्थिति ज्यादा बिगड़ चुकी थी. जैसे-तैसे लोग मेदिनीनगर सदर  अस्पताल पहुंचे. थोड़ी देर बाद ही उसकी मां चल बसी.
ट्रेन ही आवागमन का है सहारा
विश्रामपुर प्रखंड के अमवा गांव में जाने के  लिए सड़क नहीं है. गांव में यदि कोई बीमार हो गया और उसे तत्काल मेदिनीनगर लाना है, तो इस बरसात में ट्रेन के अलावा आवागमन का कोई  साधन नहीं है, क्योंकि कोई भी वाहन गांव तक नही पहुंच पाता है.
एक हजार की आबादी है
अमवा गांव विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. गांव की आबादी करीब एक हजार है. यहां के विधायक राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी हैं, लेकिन उनके इलाके में भी कई गांव ऐसे हैं, जहां आज भी एंबुलेंस  नहीं पहुंच पाती है.
1.85 करोड़ की लागत से बननी थी सड़क
अमवा गांव में सड़क बने, इसके लिए 2014-15 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत  एक करोड़ 85 लाख रुपये की लागत से योजना स्वीकृत हुई थी. एचपीएल एजेंसी को ठेका मिला था. अधूरी सड़क बना कर ठेकेदार फरार हो गया.   यह सड़क कब तक बनेगी, किसी को पता  नहीं.

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