छात्रों की भावनाओं को समझने के लिए वर्कशॉप का आयोजन

दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज की सलाह और परामर्श समिति ने फैकल्टी और टीचरों के लिए विश्वसनीय सलाहकार के रूप में शिक्षक विषय पर सलाहकार कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला यूजीसी की तर्ज पर छात्रों को उपयोगी सलाह देने की शिक्षकों की भूमिकाओं ओर जिम्मेदारियों के संदर्भ में आयोजित की गई। यह इंटरएक्टिव सेशन 100 से ज्यादा फैकल्टी मेंबर्स के लिए आयोजित किया गया, जिसमें ज़ायगो की टीम ने सलाह की जरूरत, सलाह देने वाले शिक्षक और सलाह लेने वाले छात्र का संबंध, अच्छे सलाहकार की विशेषताएं और सलाहकार की संवेदनशीलता जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। यह कार्यक्रम ज़ायगो के साथ साझेदारी में आयोजित किया गया। ज़ायगो एक हेल्थ टेक स्टार्टअप है, जो भावनात्मक बेहतरी और मनोवैज्ञानिक सलाह देने के विषय में शैक्षिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा थी।

दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज में मेंटरिंग एंड काउंसलिंग कमिटी के संयोजक डॉ. अनुभा मुखर्जी सेन के शब्दों में इंडक्शन और सलाह देने की प्रकृति समय के साथ विकसित हुई है। उदाहरण के लिए टीचरों को उनकी नई भूमिका में हर तरह का सपोर्ट मुहैया कराने के लिहाज से एक अस्थायी पुल के तौर पर इंडक्शन को सबसे पहले अपनाया गया था, जबकि नए टीचरों की मदद के लिए उन्हें एक दोस्त मुहैया कराने के लिए परामर्श समिति का गठन किया गया, पर आजकल इस समिति की कार्यप्रणाली प्रफेशनल्स की जरूरत के अनुसार टीचरों का ज्ञान बढ़ाने, उनके कौशल का विकास करने और शिक्षण में नई-नई प्रणालियां विकसित करने के इर्द-गिर्द घूमती है।

 ज़ायगो के संस्थापक अरिंदम सेन ने कहा, आधुनिक शिक्षा प्रणाली में एक शिक्षक, मार्गदर्शक और गाइड के तौर पर टीचर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। आजकल बच्चे सीखने के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर नहीं है। पढ़ाई आजकल किताबों से आगे निकल गई है और पढ़ाई को संपूर्ण बनाने के लिए व्यक्ति की सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों और जिंदगी के कौशल को शैक्षिक प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है। ईक्यू (भावनात्मक स्तर) भी आईक्यू की तरह ही महत्वपूर्ण है।

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