गुमला : जगह नहीं तो स्कूल से निकाल दी गई आदिम जनजाति की 80 छात्राएं

सरकार का नारा है : बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ. यह नारा जिले के परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का के जारी ब्लॉक में जुमला बनता नजर आ रहा है. जारी ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल से 80 छात्रों को निकाल दिया गया है. इनमें 12 विलुप्तप्राय आदिम जनजाति की छात्राएं हैं. शेष छात्राएं आदिवासी हैं.

इन छात्राओं को स्कूल से इसलिए निकाला गया कि क्लास रूम में छात्राओं के बैठने की व्यवस्था नहीं है. छात्रावास में सोने के लिए भी जगह नहीं है. इन सभी छात्राओं का हाल ही में नामांकन हुआ है. स्कूल से निकाले जाने के बाद सभी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं.

इधर, माता-पिता भी बच्चों को स्कूल से निकाले जाने से परेशान हैं, क्योंकि माता-पिता ने इस उम्मीद से बच्चों को स्कूल भेजा था कि वे पढ़ेंगे-लिखेंगे. लेकिन, शिक्षा से पहले छात्रों को स्कूल से निकाल दिया गया.

आदिम जनजाति की ये छात्राएं प्रखंड के उरईकोना, बंधकोना, डूमर पानी, और गुड़दाकोना गांव की हैं. ये गांव छत्तीसगढ़ राज्य से सटे जंगलों व पहाड़ों के बीच है.

जानकारी के अनुसार, जारी प्रखंड में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के भवन निर्माण का कार्य चल रहा है. इसके कारण जारी का स्कूल डुमरी प्रखंड के आवासीय विद्यालय में संचालित होता है.

कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों का केवल नामांकन हुआ है. इन्हें एक दिन भी विद्यालय में शिक्षा नहीं मिली है. आदिम जनजाति के प्रखंड सचिव राजेंद्र कोरवा ने कहा कि वह इस मामले को लेकर वार्डेन के पास गये थे. उन्होंने कहा कि उनके यहां कमरे कम हैं. इसलिए बच्चे को पढ़ा नहीं सकते.

राजेंद्र का कहना है कि आदिम जनजाति के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है. जल्द समस्या का निदान नहीं हुआ, तो इस मामले में उपायुक्त से हस्तक्षेप की अपील करेंगे.

 

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