‘अयोध्या में जल्द बनना चाहिए राम मंदिर’ – मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर का शीघ्र निर्माण होना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर वार्ता का समर्थन किया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय राम मन्दिर समिति को करना है जो राम मन्दिर के निर्माण के लिए अभियान की अगुवाई कर रही है. दिल्ली में आयोजित ‘भविष्य का भारत’ कार्यक्रम का आज आखिरी दिन है. आज मोहन भागवत सवालों के जवाब दे रहे हैं. पिछले दो दिनों में श्रोताओं से कुल 25 सवाल लिए गए हैं.

संघ प्रमुख ने कहा कि उन्हें यह नहीं मालूम कि राम मंदिर के लिए अध्यादेश जारी किया जा सकता है क्योंकि वह सरकार के अंग नहीं हैं. उन्होंने कहा कि क्या अध्यादेश जारी किया जा सकता है और इसे कानूनी चुनौती मिल सकती है..ऐसे मुद्दों पर विचार किया जाना चाहिए.

सवाल- क्या मॉब लिंचिंग उचित हैगौ रक्षा कैसे होगी?

 

मोहन भागवत- किसी भी प्रश्न पर हिंसा करना, अत्यंत अनुचित व्यवहार है. उसपर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. केवल गाय क्यों?  मैं पशु चिकित्सक हूं, ये आस्था का विषय भी है. गौ रक्षा केवल कानून से नहीं होगी. गौ रक्षा करने वाले पहले गाय रखें लेकिन वह रखेंगे नहीं बल्कि उन्हें खुला छोड़ देंगे, इसलिए गौ रक्षा पर सवाल उठते हैं. अच्छी गौशाला चलाने वाले मुसलमान भी देश में हैं. लोग लिंचिंग पर तो आवाज़ करते हैं, लेकिन गौ तस्कर जो हमला करते हैं उस पर आवाज़ नहीं करते. ये प्रवत्ति गलत है. जो उपद्रवी तत्त्व हैं, उन्हें छोड़ दें. गौ रक्षा करनी चाहिए.

सवाल- हिन्दुज़्म को हिंदुत्व कहा जा सकता है?

 

मोहन भागवत- हिंदुत्व को हिन्दुज़्म नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इज़्म का मतलब ‘बंद’ है. राधामोहन जी का एक कोड है उसका एक हिस्सा ही बता सकता हूं. हिदुत्व ही तालमेल का आधार बन सकता है. कुछ लोग जानते हैं और कुछ लोग गर्व से कहते हैं. कुछ लोग किसी कारणवश इसे स्वीकार नहीं करते हैं. भारत में इतनी विविधता है कि कई बार एक दूसरों के विरोधी भी लगते हैं. भारत में परायापन नहीं है, ये हमने पैदा किया है.

 

सवाल- क्या सामाजिक समरसता के लिए रोटी-बेटी का व्यवहार किया जा सकता है?

 

मोहन भागवत- रोटी बेटी का सम्बंध का हम समर्थन करते हैं. रोटी का तो ठीक है लेकिन जब बेटी का सम्बंध करते है तो ये दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का सम्बंध होता है. इसलिए हम इसका समर्थन करते हैं. महारष्ट्र में साल 1942 में पहला अंतरजातीय विवाह हुआ था. अगर परसेंटेज निकाला जाए तो आरएसएस के स्वयंसेवकों का परसेंटेज सबसे ज़्यादा निकलेगा. जब हम ये करेंगे तो हिन्दू समाज बटेगा नहीं. ये हम सुनिश्चित कर सकते हैं, लेकिन हिन्दू समाज बटेगा नहीं क्योंकि हिंदुत्व, हिन्दू की आत्मा है और शरीर बहुत दिनों तक अलग नहीं रह सकता.

 

सवाल- हिन्दू समाज जाति व्यवस्था को कैसे देखता हैहिन्दू समाज में एससी/एसटी का क्या स्थान है?

 

मोहन भागवत- इसे जाति व्यवस्था कहते हैं, ये गलत है.  ये व्यवस्था कहां है? ये तो अव्यवस्था है. ये खत्म होना तय है. हम विषमता में भरोसा नहीं करते. ये लंबी यात्रा है और करनी पड़ेगी. हम संघ में जाति नहीं पूछते. जब मैं संघचालक चुना गया तो मीडिया ने चलाया कि भागवत चुने गए, लेकिन ओबीसी को प्रतिनिधित्व देना है इसलिए सोनी जी को बनाया गया. जब मैंने पूछा कि सोनी जी आप ओबीसी में आते हैं क्या? वे मुस्कुरा दिए और आज तक मुझे नहीं पता है कि सोनी जी क्या हैं.

 

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