अल्पसंख्यक समुदाय के 42 लोगों के हत्याकांड में 16 पूर्व पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा

उत्तरप्रदेश के मेरठ में हुए हत्याकांड में अल्पसंख्यक समुदाय के 42 लोगों को मार दिया गया था। मामले में ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने नरसंहार के लिए निशाना बनाकर की गई हत्या शब्द का प्रयोग करते हुए हत्याकांड में शामिल 16 पूर्व पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई हैं।

जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने आईपीसी के तहत प्रोविंशियल आर्म्ड कॉन्स्टेब्लरी (पीएसी) 16 पूर्व पुलिसकर्मियों को हत्या, सबूत नष्ठ करने का दोषी करार दिया हैं। हालाांकि सभी सिपाही अभी रिटायर्ट हो चुके हैं लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद इन पर कार्यवाही होगी।

आपको बता दें की 3 साल पहले ही ट्रायल कोर्ट ने इन पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया था लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। 6 सितंबर को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट ने भाजपा नेता की उस याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसमें नरसंहार मामले में तब राज्यमंत्री रहे पी. चिदंबरम की जांच कराने की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 8 मार्च 2013 को चिदंबरम की जांच कराने वाली स्वामी की याचिका खारिज कर दी थी।

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