भारत-पाकिस्तान की ‘साझा किताब’ में पाकिस्तान की पोल खुली

पाकिस्तानी और हिंदुस्तानी मीडिया में एक किताब चर्चा का विषय बनी हुई है. इस किताब को लिखा है भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख ले.जनरल (सेवानिवृत्त) असद दुर्रानी ने, जिसका नाम है ‘द स्पाई क्रॉनिकल्स: रॉ, आईएसआई एंड द इल्यूजन ऑफ पीस’. इस किताब के चर्चा में आने के बाद पाकिस्तानी सेना ने दुर्रानी को तलब किया और इस किताब में उनके द्वारा लिखी गई बातों पर उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया. आइए जानते हैं इसमें ऐसा क्या लिखा है और यह क्यों चर्चा में है… खास बात यह है कि इस किताब को किसी एक शख्स ने नहीं लिखा है, बल्कि इसे मिल-बांटकर लिखा गया है. इस किताब को लिखने में असद दुर्रानी, ए एस दुलत के साथ पत्रकार आदित्य सिन्हा का भी योगदान है. कहा जा रहा है कि ये अपनी तरह की पहली किताब भी हो सकती है. दरअसल इसमें दोनों देशों की एजेंसियों की कई बातें लिखी गई हैं. किताब में कश्मीर, हाफिज सईद, 26/11 मुंबई हमला, कुलभूषण जाधव, सर्जिकल स्ट्राइक, ओसामा बिन लादेन को लेकर समझौता, भारत-पाकिस्तान संबंधों में अमेरिका और रूस की भूमिका और भारत और पाकिस्तान के बीच शांतिपूर्ण वार्ता के आतंकवाद से खंडित होने को लेकर दुर्रानी ने अपना पक्ष और आकलन पेश किया है. दुर्रानी को उनकी किताब के विमोचन के लिए भारत ने वीजा देने से इनकार कर दिया गया था. इस किताब को 23 मई को नई दिल्ली में भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने संयुक्त रूप से विमोचित किया था. रिपोर्ट्स के अनुसार इस किताब को लिखने की कहानी काफी दिलचस्प है और इसका कॉन्सेप्ट भी बहुत रोचक है. खास बात ये है कि इस किताब को लिखते वक्त लेखकों ने एक दूसरे से मुलाकात की और वो मुलाकात भारत-पाकिस्तान के बजाय इस्तांबुल, बैंकॉक, काठमांडू आदि देशों में हुई थी. दुलत और दुर्रानी इस्तानबुल, बैंकॉक और काठमांडू जैसे शहरों में मिले और उनकी कुल बैठकों से 1.7 लाख शब्द बाहर आए, जिसमें से आधे का पुस्तक में जिक्र है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, किताब में दुर्रानी ने दावा किया है कि पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को ओसामा बिन लादेन के खिलाफ एबटाबाद में होने वाले अमेरिका के ऑपरेशन की जानकारी थी और इस संबंध में दोनों सरकारों के बीच डील हुई थी. दुलत ने भी दावा किया है कि भारत को भी यही लगता था कि उसे पाकिस्तान द्वारा सौंपा गया था .

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