झारखंड क्यों बनता जा रहा है भुखमरी का अड्डा ?

भारत को कृषि प्रधान  देश कहा जाता है. लेकिन देश में अब भी भूख से मौतें हो रही हैं. ये मौते बीजेपी शासित राज्य झारखंड में हो रही हैं. तीन दिनों के अंदर झारखंड में भूख से मौत के दो मामले सामने आए हैं. ये दो तस्वीरें देख लीजिए , एक झारखंड के जिला गरिडिह की तस्वीर है तो दूसरी तरफ चतरा जिले की तस्वीर है, इन तस्वीरो में लोग भले ही अलग अलग है लेकिन दोनो एक ही परिस्थिति के शिकार है, दोनो झारखंड के सिस्टम के ही मारे हुए है क्योंकि दोनो जगह जो मौते हुई है वो भूख से हुई है… जी, कृषि प्रधान देश में जहां जय किसान का नारा लगता है उसी किसानी वाले देश में लोग भूख से मर रहे है…. सबसे पहले बात चतरा की करते है…. इस युवक के कंधे पर झारखंड सरकार के उस सिस्टम की लाश है जो सबका साथ सबका विकास का वादा करके पूरा नहीं करती है… दरअसल चरत के प्रेम नगर के रहने वाले इस परिवार का दावा है कि पैसों की कमी के कारण उसकी मां ने बीते दस दिनों से कुछ भी नहीं खाया था. मृतक महिला कूड़ा बीनने का काम करती थी और उसी के सहारे अपना पेट पालती थी.लेकिन जब कुछ रोज कमाई नहीं हुई तो भूखे पेट रहने के कारण मौत हो गई.  गरीब महिला की मौत के बाद बेटे गौतम कुमार ने 108 एंबुलेंस पर फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई. बेटा अपनी मां के शव को कंधे पर रखकर डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर इटखोरी के सरकारी अस्पताल पहुंचा. हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि महिला की मौत की वजह टीबी की बीमारी है. तो दूसरी तस्वीर झारखंड के ही गिरिडीह जिले की है…चतरा वाली घटना से पहले 62 साल की सावित्री देवी की मौत हो गई. परिवार का दावा है कि परिवार में आर्थिक तंगी है. जिसकी वजह से बीते कई दिनों से घर में चूल्हा तक नहीं जला. जिसकी वजह से सावित्री देवी की जान चली गई. सावित्री देवी के पास आधार कार्ड तो था लेकिन राशन कार्ड नहीं बन पाया था ऐसे में हालात बिगड़े औऱ सावत्रि देवी की जान चली गई . दरअसल झारखंड का ये कोई पहला या दूसरा मामला नहीं है इससे पहले भी लगातार झारखंड में भूखमरी की खबरे आती रही है.. पिछले साल अक्टूबर महीने में झारखंड के सिम्डेगा जिले में 11 साल की संतोषी नाम की बच्ची की मौत हो गई थी. संतोषी की मां कोयली देवी ने कहा था कि आधार से राशन कार्ड लिंक न होने के कारण उन्हें राशन नहीं मिला और उनकी बेटी की भूख से मर गई.वहीं धनबाद, जमशेदपुर जैसे जिले में भी भूखमरी से मौत की खबर आई थी. हालांकि ये अलग बात है कि झारखंड में लगातार ऐसी घटनाएं घट रही है और बावजूद इसके रोकथाम का झारखंड की सियासत अपने शुरुर में है. सयुंक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 20 करोड़ लोग रोजाना भूखे सोते हैं. देश का हर छठा व्यक्ति भूख से सोने को मजबूर है. इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत में 19 करोड़ चार लाख लोगों को भर पेट खाना भी नहीं मिलता है. दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा लोगों को भर पेट भोजन नहीं मिलता. 119 देशों के हंगर इंडेक्स की सूची में भारत 100वें नंबर पर है. भारत की स्थिति पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से भी खराब है.

तो फिर सवाल है कि झारखंड के मुख्यमंत्री जो देश के प्रधानमंत्री के कामो और कर्मो से खुद को प्रेरित बताते है तो फिर उनके सिस्टम में ऐसी कौन मजबूरी है जो लोग भूख से मर जाते है और उन्हे  रघुवर दास की सरकार रोटी भी नहीं दे सकती है…

 

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